एक सुंदर घाटी में लियो नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उनका पूरा गाँव एक छोटी सी झील और खेतों पर निर्भर था। लेकिन एक साल, आसमान में बादल तो आए, पर बारिश नहीं हुई। हफ़्तों बीत गए, लेकिन पानी की एक बूंद भी नहीं गिरी। झील सूखने लगी और खेत फटने लगे।
लियो के पिता परेशान होकर बोले, 'दादाजी, बिना पानी के हम कैसे जिएंगे? खेती कैसे होगी?' लियो ने पूछा, 'क्या हम कुआँ खोद सकते हैं?' दादाजी ने प्यार से समझाया, 'बेटा, हम कुआँ खोद सकते हैं, लेकिन हम आसमान को आदेश नहीं दे सकते। जैसे पानी के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है, वैसे ही बारिश के बिना पानी का आना भी संभव नहीं है।'
लियो और उसका परिवार इंतज़ार करते रहे। फिर एक शाम, आसमान गहरा काला हो गया और ठंडी हवा चलने लगी। धीरे-धीरे बारिश की बूंदें गिरने लगीं। देखते ही देखते झील फिर से भर गई। लियो ने महसूस किया कि इंसान चाहे कितनी भी मेहनत कर ले, लेकिन प्रकृति की इस वर्षा के बिना सब कुछ अधूरा है।