एक सुंदर से गाँव में कवि नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। दादाजी वृद्ध थे, लेकिन उनके चेहरे पर हमेशा एक अद्भुत शांति और चमक रहती थी। एक दिन कवि ने अपने दोस्त रोहन को देखा, जो बहुत उदास और गुस्से में था। रोहन को बाज़ार में एक खिलौना दिखा था, जो उसे मिल नहीं पाया था।
कवि ने अपने दादाजी से पूछा, "दादाजी, रोहन हमेशा किसी न किसी चीज़ के लिए दुखी क्यों रहता है? और आपको कभी किसी चीज़ की चाहत क्यों नहीं होती? आप इतने शांत कैसे रहते हैं?"
दादाजी मुस्कुराए और कवि को बगीचे में ले गए। उन्होंने कहा, "कवि, इन फूलों को देखो। ये कितने सुंदर हैं! लेकिन ये कभी किसी से कुछ माँगते नहीं हैं। ये प्रकृति के नियमों का पालन करते हैं, जो आवश्यक है उसे स्वीकार करते हैं और बिना किसी लालच के अपनी खुशबू फैलाते हैं। मनुष्य को भी ऐसा ही होना चाहिए। जो अपनी इच्छाओं पर विजय पा लेते हैं और अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, वही वास्तव में महान होते हैं।"
कवि समझ गया कि असली खुशी चीज़ों को इकट्ठा करने में नहीं, बल्कि मन की शांति और अच्छे आचरण में है।