एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन का दिल बहुत साफ़ था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह नेक काम करने की सोचता तो था, पर अक्सर कहता, 'अभी नहीं, बाद में करूँगा।'
एक दिन उसके दादाजी ने उसे समझाते हुए कहा, 'अर्जुन, नेकी कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे कभी-कभी किया जाए। जितना हो सके, हर संभव तरीके से, निरंतर भलाई करते रहो।'
उसी दोपहर, अर्जुन ने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति भारी सामान उठाने में संघर्ष कर रहे हैं। अर्जुन के मन में आया, 'अभी तो खेलने का समय है, बाद में मदद करूँगा।' पर दादाजी की बात याद आते ही वह दौड़कर गया और उनकी मदद की। उस बुजुर्ग की मुस्कान ने अर्जुन का दिल जीत लिया।
अगले कुछ दिनों में, उसने एक छोटी सी चिड़िया के बच्चे को पेड़ से गिरने से बचाया और अपने दोस्त की खोई हुई पेंसिल ढूँढने में मदद की। उसने सीखा कि छोटे-छोटे नेक काम जब लगातार किए जाते हैं, तो वे बड़े बदलाव लाते हैं।
समय बीता और अर्जुन एक सफल व्यक्ति बना। उसने केवल धन ही नहीं कमाया, बल्कि अपने जीवन में ईमानदारी, दया और सच्चाई को हमेशा बनाए रखा। उसकी निरंतर अच्छाई ने पूरे समाज को एक सूत्र में बाँध दिया।