एक सुंदर से गाँव में कार्तिक नाम का एक लड़का रहता था। वह हमेशा दूसरों को दिखाने के लिए बड़े-बड़े नेक काम करता था। त्योहारों पर वह बहुत दान करता था और गाँव के लोग उसकी बहुत प्रशंसा करते थे। लेकिन कार्तिक के मन में दया नहीं, बल्कि प्रसिद्धि पाने की इच्छा थी।
उसी गाँव में अर्जुन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। अर्जुन के पास बहुत कम साधन थे, लेकिन उसका दिल बहुत साफ था। एक शाम, अर्जुन ने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति कुएं के पास चलने में संघर्ष कर रहे हैं। बिना किसी को दिखाए, अर्जुन ने चुपचाप अपनी रोटी का एक टुकड़ा और अपना पानी उस बुजुर्ग को दे दिया। उस समय न तो कोई उसे देख रहा था और न ही कोई उसकी तारीफ करने वाला था।
एक बार कार्तिक ने एक बहुत बड़ा भोज आयोजित किया। पूरे गाँव ने उसकी सराहना की। लेकिन उस रात जब कार्तिक सोने गया, तो उसका मन अशांत था। उसे महसूस हुआ कि उसके सारे अच्छे काम केवल दिखावे के लिए थे। उसने सोचा कि अर्जुन कितना शांति से सोता होगा, जिसने बिना किसी शोर के मदद की। उस दिन के बाद, कार्तिक ने दूसरों को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि अपने मन को शुद्ध रखने के लिए अच्छे काम करना शुरू किया। अब उसके चेहरे पर दिखावे की मुस्कान नहीं, बल्कि सच्ची शांति थी।