एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने पिता रवि के साथ रहता था। रवि बहुत ही ईमानदार व्यक्ति थे। एक दोपहर, एक प्यासा और थका हुआ बुजुर्ग उनके घर के दरवाजे पर आया। अर्जुन अपने खिलौनों से खेल रहा था। उसने पूछा, 'पिताजी, क्या हमें उन्हें पानी देना चाहिए?' उसकी माँ ने कहा, 'अभी काम बहुत है, बाद में देखेंगे।' अर्जुन ने भी सोचा कि शायद बाद में करना ठीक रहेगा।
लेकिन रवि ने उसे रोका। 'अर्जुन, नेक काम को कभी कल पर नहीं टालना चाहिए। यह उस दोस्त की तरह है जो मरते दम तक हमारा साथ निभाता है।' रवि तुरंत गए और उस बुजुर्ग को पानी और भोजन दिया।
सालों बीत गए। रवि बहुत बीमार हो गए और परिवार मुश्किल में था। उस समय गाँव में एक बड़ी समस्या आई। तभी, एक डॉक्टर वहाँ मदद के लिए आया। वह वही बुजुर्ग था जिसकी मदद रवि ने सालों पहले की थी (उसका बेटा डॉक्टर बनकर आया)। उसने रवि के परिवार की बहुत मदद की और रवि की जान बचाई।
अर्जुन अब बड़ा हो गया था। उसने अपने बेटे को समझाया, 'अच्छाई केवल एक कार्य नहीं है, बल्कि वह एक साथी है जो जीवन के अंतिम क्षण तक हमारे साथ चलता है।'