पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में अर्जुन अपने दादाजी के साथ रहता था। अर्जुन के दादाजी बहुत ही नेक इंसान थे और हमेशा किसी न किसी की मदद करने में लगे रहते थे। एक शाम अर्जुन ने पूछा, "दादाजी, आप रोज़ इतनी मेहनत क्यों करते हैं? आप थोड़ा आराम क्यों नहीं करते?"
दादाजी मुस्कुराए और बोले, "अर्जुन, हमारा किया हुआ हर छोटा सा अच्छा काम एक बीज की तरह है। अगर हम रोज़ एक बीज बोएंगे, तो एक दिन वह एक विशाल पेड़ बन जाएगा।"
अगले दिन अर्जुन ने इसे आज़माने का फैसला किया। स्कूल से लौटते समय उसने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति भारी सामान उठाने में संघर्ष कर रहे हैं। पहले तो अर्जुन का मन खेलने जाने का था, लेकिन उसे दादाजी की बात याद आई। वह आगे बढ़ा और सामान उठाने में उनकी मदद की। उस बुजुर्ग की मुस्कान देखकर अर्जुन को बहुत खुशी हुई।
अब अर्जुन ने नियम बना लिया कि वह एक भी दिन बिना किसी नेक काम के नहीं गुज़ारेगा। कभी उसने किसी घायल पक्षी की मदद की, तो कभी किसी भूखे जानवर को खाना खिलाया। धीरे-धीरे यह उसकी आदत बन गई।
सालों बाद, अर्जुन बड़ा होकर एक सफल व्यक्ति बना। एक बार जब वह जीवन के कठिन दौर से गुज़र रहा था, तब उन्हीं लोगों ने उसकी मदद की जिनकी उसने बरसों पहले छोटी-छोटी मदद की थी। अर्जुन के द्वारा बोए गए नेकी के वे छोटे-छोटे बीज आज एक मज़बूत पेड़ बन चुके थे, जिसने उसके जीवन के रास्ते को सुरक्षित कर दिया था।