एक सुंदर से गाँव में आर्यन और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। आर्यन एक किसान था और मीरा एक कुशल बुनकर थी। वे दोनों बहुत सुखी थे। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। फसलें बर्बाद हो गईं और लोगों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया। आर्यन बहुत चिंतित था। उसने मीरा से कहा, 'मीरा, हमें अपने अनाज को बचाकर रखना चाहिए ताकि हम आने वाले महीनों तक जीवित रह सकें।'
मीरा ने कुछ देर सोचा। वह जानती थी कि गाँव के कई परिवार भूख से जूझ रहे हैं। उसने आर्यन से कहा, 'आर्यन, अपने लिए बचाना जरूरी है, लेकिन जब हमारे पड़ोसी भूखे हों, तो क्या सिर्फ अपने बारे में सोचना सही है? नेक काम करना ही सबसे बड़ा धर्म है।'
आर्यन पहले तो हिचकिचाया, लेकिन मीरा की आँखों में दया देखकर उसका मन बदल गया। उन्होंने तय किया कि वे अपने अनाज का एक हिस्सा जरूरतमंदों में बाँट देंगे। हालाँकि इससे उनके पास कम अनाज बचा, लेकिन उनके मन को बहुत शांति मिली। जल्द ही बारिश हुई और खेत फिर से लहलहा उठे। गाँव वालों ने उनके इस त्याग का बहुत सम्मान किया। आर्यन और मीरा ने महसूस किया कि उनका घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि प्रेम और सच्चाई से बना है।