एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक किसान अपनी पत्नी मीरा के साथ रहता था। वे दोनों बहुत मेहनती थे। वे साल भर कड़ी मेहनत करते और अपनी कमाई का एक हिस्सा बचाकर रखते थे। अर्जुन अक्सर मीरा से कहता, 'हम यह बचत केवल अपने लिए नहीं कर रहे, बल्कि इसलिए कर रहे हैं ताकि जब कभी कोई ज़रूरत मंद हमारे द्वार पर आए, तो हम उसकी मदद कर सकें।'
एक तूफानी रात, जब बाहर तेज़ बारिश हो रही थी, उनके दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी। जब अर्जुन ने दरवाज़ा खोला, तो उसने एक वृद्ध व्यक्ति और एक छोटे लड़के को देखा, जो ठंड से कांप रहे थे। वे रास्ता भटक गए थे और उनके पास रुकने की कोई जगह नहीं थी।
मीरा ने तुरंत उनके लिए सूखे कपड़े और गरमा-गरम भोजन तैयार किया। अर्जुन ने अपने भंडार से अनाज निकालकर उन्हें दिया। जब उन यात्रियों ने भरपेट भोजन किया और चैन की नींद सोए, तो अर्जुन और मीरा के मन को एक असीम शांति मिली।
अगली सुबह जब वे जाने लगे, तो उस वृद्ध व्यक्ति ने अर्जुन का हाथ थामकर कहा, 'बेटा, जो धन तुमने जोड़ा है वह तुम्हारी ज़रूरतें पूरी करेगा, लेकिन जो दया तुमने आज दिखाई है, वह तुम्हारे जीवन को सार्थक बनाएगी।' अर्जुन समझ गया कि उसकी मेहनत का असली मकसद क्या था।