एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसकी बातें अक्सर दूसरों को चुभती थीं। एक दिन, उसके दोस्त रोहन ने उसे अपनी बनाई हुई एक पेंटिंग दिखाई। अर्जुन ने उसे देखकर मजाक उड़ाते हुए कहा, 'यह क्या बेकार चीज़ बनाई है! इसे देखकर किसे खुशी होगी?' रोहन की आँखों में आँसू आ गए और वह चुपचाप वहाँ से चला गया।
उस शाम, अर्जुन के दादाजी ने उसे पास बिठाया और समझाया, 'अर्जुन, शब्द तलवार की तरह भी हो सकते हैं और फूलों की तरह भी। शब्द किसी को दुखी कर सकते हैं और किसी को सहारा भी दे सकते हैं। हमें ऐसे शब्द बोलने चाहिए जो दूसरों के काम आएँ और उनके मन को खुशी भी दें।'
अगले दिन स्कूल में, रोहन फिर से चित्र बना रहा था। अर्जुन उसके पास गया और धीरे से बोला, 'रोहन, कल मैंने जो कहा उसके लिए मुझे माफ कर दो। तुम्हारी इस पेंटिंग के रंग बहुत सुंदर हैं। तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो!' रोहन का चेहरा खुशी से खिल उठा। उस दिन के बाद से, अर्जुन जब भी बोलता, उसके शब्द दूसरों के चेहरे पर मुस्कान और दिल में भरोसा लेकर आते।