एक छोटे से कस्बे में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता की एक किराने की दुकान थी। आर्यन मेहनती था, लेकिन उसके मन में अक्सर यह विचार आता था कि दूसरों के सामान की इतनी सावधानी से देखभाल करना क्यों ज़रूरी है?
एक सुबह, उसके दोस्त रोहन ने उसे चावल की एक बड़ी बोरी दी। रोहन ने कहा, 'आर्यन, यह मेरी माँ ने बेचने के लिए दी है। कृपया इसका बहुत ध्यान रखना।' आर्यन ने वादा किया कि वह सावधानी बरतेगा।
एक दिन दुकान पर बहुत भीड़ थी। आर्यन के मन में एक विचार आया, 'अगर मैं रोहन के चावल में थोड़ा सा घटिया चावल मिला दूँ, तो किसी को पता नहीं चलेगा और मुझे थोड़ा ज़्यादा मुनाफा हो जाएगा।' लेकिन तभी उसे अपने पिता की बात याद आई: 'एक सच्चा व्यापारी वही है जो दूसरों के सामान को अपने सामान की तरह ही संभालकर और प्यार से रखे।'
आर्यन ने तुरंत अपना विचार बदल दिया। कुछ दिनों बाद, शहर में तेज़ बारिश हुई। आर्यन ने अपनी चीज़ों से भी ज़्यादा ध्यान देकर रोहन की बोरी को भीगने से बचाया और उसे सुरक्षित रखा। जब रोहन चावल लेने आया, तो वह देखकर बहुत खुश हुआ कि एक दाना भी खराब नहीं हुआ था। आर्यन को उस दिन जो सुकून मिला, वह मुनाफे से कहीं बढ़कर था।