एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन पढ़ाई में बहुत तेज़ था। उसे विज्ञान और गणित के बारे में सब कुछ पता था। उसे अपनी बुद्धिमानी पर बहुत गर्व था। लेकिन उसकी एक समस्या थी—वह हमेशा दूसरों को नीचा दिखाकर अपनी जानकारी झाड़ता था।
एक दिन गाँव के बच्चे मिलकर खेल रहे थे। अर्जुन वहाँ गया और कहने लगा, 'तुम सब गलत खेल रहे हो! देखो, मुझे सब पता है, मैं बताता हूँ कैसे खेलते हैं।' उसने पूरे समय बच्चों की गलतियाँ निकालीं। बच्चे परेशान हो गए और उन्होंने अर्जुन के साथ खेलना बंद कर दिया। अर्जुन अकेला रह गया।
वह उदास होकर अपनी दादी के पास गया और बोला, 'दादी, मुझे सब कुछ पता है, फिर भी कोई मेरे साथ क्यों नहीं खेलता?' दादी ने प्यार से समझाया, 'बेटा, बहुत कुछ सीखना अच्छी बात है, लेकिन दुनिया के साथ कैसे रहना है, दूसरों का सम्मान कैसे करना है, यह सीखना उससे भी ज़रूरी है। जो व्यक्ति समाज के साथ मिल-जुलकर रहना नहीं जानता, वह कितना भी पढ़ ले, वह वास्तव में अज्ञानी ही है।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। अगले दिन वह बच्चों को सिखाने नहीं, बल्कि उनके साथ खेलने और उनकी बातें सुनने गया। धीरे-धीरे, सभी बच्चे उसके दोस्त बन गए।