एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शांत और दयालु स्वभाव का था। उसका पड़ोसी रोहन अक्सर उसे परेशान करता और उसका मज़ाक उड़ाता था। एक दिन, अर्जुन बहुत मेहनत से एक सुंदर चित्र बना रहा था। तभी रोहन दौड़ता हुआ आया और उसने जानबूझकर अर्जुन के चित्र पर स्याही गिरा दी, जिससे चित्र खराब हो गया। अर्जुन को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। रोहन हंसते हुए वहाँ से चला गया।
अर्जुन के दोस्त समीर ने गुस्से में कहा, 'अर्जुन, तुमने उसे कुछ कहा क्यों नहीं? उसने तुम्हारे साथ इतना बुरा व्यवहार किया!' अर्जुन ने शांति से उत्तर दिया, 'अगर मैं भी उसके साथ वैसा ही बुरा व्यवहार करूँगा, तो मैं भी उसी के जैसा बन जाऊँगा। मैं उसके बुरे व्यवहार की वजह से अपनी अच्छाई नहीं छोड़ना चाहता।'
कुछ दिनों बाद, खेलते समय रोहन का पैर फिसल गया और उसे काफी चोट आई। कुछ बच्चे उसे देखकर हँसने लगे, लेकिन अर्जुन तुरंत दौड़कर उसके पास गया और उसकी मदद की। रोहन ने रोते हुए पूछा, 'मैंने तुम्हारे साथ इतना बुरा किया, फिर भी तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?' अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा, 'तुमने जो किया वह गलत था, लेकिन सही रास्ते पर चलना ही मेरी पहचान है।' रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अर्जुन से माफी मांगी। उस दिन के बाद वे पक्के दोस्त बन गए।