एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शांत और धैर्यवान था। उसी गाँव में विक्रम नाम का एक लड़का भी रहता था, जिसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। एक दिन, जब दोनों खेल रहे थे, विक्रम ने जानबूझकर अर्जुन के खिलौने तोड़ दिए। 'तुम बहुत कमजोर हो, मैं जो चाहूँ वो कर सकता हूँ!' विक्रम ने अहंकार से कहा।
अर्जुन को बुरा लगा, लेकिन उसने गुस्सा नहीं किया। वह चुपचाप अपने टूटे हुए खिलौने उठाकर वहाँ से चला गया। अगले दिन, खेलते समय विक्रम का पैर फिसल गया और वह एक गहरे गड्ढे में गिर गया। उसके पैर में चोट लग गई और वह उठ नहीं पा रहा था। वह डर के मारे रोने लगा, लेकिन उसके बाकी दोस्त उसे छोड़कर भाग गए।
तभी अर्जुन वहाँ आया। अर्जुन ने यह नहीं सोचा कि विक्रम ने उसके साथ बुरा व्यवहार किया था। उसने बड़े प्यार से विक्रम को गड्ढे से बाहर निकाला और उसे छाया में बिठाया। विक्रम शर्मिंदा था। उसने पूछा, 'मैंने तुम्हारे साथ बुरा किया, फिर भी तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?' अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा, 'विक्रम, क्रोध से नहीं, बल्कि धैर्य और प्रेम से ही किसी का दिल जीता जा सकता है।' विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अर्जुन से माफी मांगी। उस दिन के बाद वे पक्के दोस्त बन गए।