एक सुंदर गाँव में कदिर और नीला नाम के दो दोस्त रहते थे। दोनों को चित्रकारी करने का बहुत शौक था। एक दिन गाँव के एक बड़े कलाकार ने एक प्रतियोगिता रखी। जीतने वाले को रंगों का एक बहुत ही सुंदर सेट इनाम में मिलना था।
कदिर बहुत तेज़ी से चित्र बनाता था, जबकि नीला बहुत बारीकी से चित्र बनाती थी। प्रतियोगिता के दौरान, नीला द्वारा बनाई गई पेंटिंग बहुत ही शानदार और जीवंत थी। जजों ने नीला को विजेता घोषित किया।
अपनी सहेली की जीत देखकर कदिर को खुशी होने के बजाय मन में एक कड़वाहट महसूस हुई। 'नीला ही क्यों? मैंने भी तो इतनी मेहनत की थी!' उसके मन में जलन पैदा हो गई। उस दिन वह बहुत उदास रहा और नीला से बात भी नहीं की।
रात को कदिर के पिता ने उसे समझाया, 'बेटा, जैसे हमें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, वैसे ही यह भी ज़रूरी है कि हमारे मन में किसी के लिए जलन न हो। अगर तुम नीला की सफलता में खुश होना सीख जाओगे, तो तुम्हारा मन शांत रहेगा।'
अगली सुबह कदिर को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह नीला के पास गया और बोला, 'नीला, तुम्हारी पेंटिंग वाकई बहुत सुंदर थी। मुझे माफ कर दो, मैं तुमसे जल रहा था।' नीला ने मुस्कुराकर उसे गले लगा लिया। उस दिन के बाद से कदिर ने दूसरों की प्रगति देखकर खुश होना सीख लिया और उसका मन प्रसन्न रहने लगा।