एक सुंदर गाँव में कवि और रोहन नाम के दो मित्र रहते थे। कवि एक मेहनती किसान था, जबकि रोहन अक्सर दूसरों की तरक्की देखकर जलता था।
एक साल, कवि ने अपने छोटे से खेत में दिन-रात मेहनत की। उसकी मेहनत रंग लाई और उसके खेत में इतनी अच्छी फसल हुई कि पूरा गाँव उसे देखता रह गया। कवि ने अपनी कमाई से गाँव के बच्चों के लिए नई किताबें खरीदीं।
कवि की सफलता देखकर रोहन खुश होने के बजाय ईर्ष्या करने लगा। उसने सोचा, 'कवि के पास इतना धन कहाँ से आया? मेरे पास क्यों नहीं?' रोहन सारा समय कवि की सफलता के बारे में सोचने और दुखी होने में बिताने लगा। इस चक्कर में उसने अपने खेत की देखभाल करना छोड़ दिया और उसका खेत बंजर हो गया।
कवि ने जब रोहन की हालत देखी, तो वह उसके पास गया और प्यार से बोला, 'मित्र, जब हम दूसरों की खुशी में खुश होते हैं, तो हमारा मन शांत रहता है और हमें और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। ईर्ष्या केवल हमें पीछे खींचती है।'
रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि दूसरों की संपत्ति देखकर जलने से न तो मन को शांति मिलती है और न ही जीवन में उन्नति होती है।