एक सुंदर गाँव में रवि और सोमू नाम के दो पड़ोसी रहते थे। रवि एक मेहनती माली था, जिसके पास एक छोटा सा लेकिन बहुत ही सुंदर बगीचा था। सोमू के पास बहुत बड़ी ज़मीन थी, लेकिन वह बहुत आलसी था। जब भी रवि के बगीचे में नए फूल खिलते, सोमू को खुशी होने के बजाय जलन होती थी। वह अक्सर सोचता, 'रवि के पास ही इतने अच्छे फूल क्यों आते हैं? उसकी किस्मत इतनी अच्छी क्यों है?'
धीरे-धीरे रवि का बगीचा पूरे गाँव में मशहूर हो गया। उसकी मेहनत से उसे बहुत सम्मान और समृद्धि मिलने लगी। सोमू, जो केवल रवि की सफलता को देखकर जलता रहता था, उसने अपने बड़े खेतों की देखभाल करना छोड़ दिया। वह अपना सारा समय इस बात पर बर्बाद करने लगा कि रवि कितना आगे बढ़ गया है। इस चक्कर में उसने अपने खेतों में खरपतवार और झाड़ियाँ उगने दीं।
कुछ ही समय में, सोमू की उपजाऊ ज़मीन बंजर होने लगी और उसकी संपत्ति घटने लगी। जहाँ एक ओर रवि का जीवन खुशहाल हो रहा था, वहीं सोमू गरीबी और तनाव में डूब गया। तब सोमू को समझ आया कि दूसरों की तरक्की से जलने के कारण उसने अपना ही नुकसान कर लिया है। उसने रवि से माफी मांगी और मेहनत करने का संकल्प लिया।