एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने पिता रवि के साथ रहता था। रवि एक ईमानदार लकड़हारा था। एक दिन जंगल में काम करते समय, रवि को एक पेड़ के नीचे चमकता हुआ सोने का सिक्का मिला। अर्जुन की आँखें चमक उठीं, "पिताजी, इस सिक्के से हम ढेर सारी मिठाइयाँ और खिलौने खरीद सकते हैं!"
रवि ने प्यार से कहा, "अर्जुन, यह सिक्का हमारा नहीं है। यदि हम किसी और की चीज़ ले लेंगे, तो हमारा मन कभी शांत नहीं रहेगा।" अर्जुन के मन में एक पल के लिए लालच आया, लेकिन अपने पिता की सच्चाई देखकर उसे शर्म महसूस हुई। उसने समझ लिया कि गलत तरीके से कमाया गया धन कभी खुशी नहीं देता।
अगले दिन, अर्जुन ने देखा कि गाँव का व्यापारी अपना सिक्का खो जाने के कारण बहुत दुखी है। रवि ने तुरंत वह सिक्का व्यापारी को लौटा दिया। व्यापारी ने सबके सामने रवि की ईमानदारी की प्रशंसा की। अर्जुन ने उस दिन एक बहुत बड़ी बात सीखी: जो लोग लालच के लिए अपनी ईमानदारी नहीं छोड़ते, वही वास्तव में सुखी रहते हैं।