एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बुद्धिमान था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह बहुत ज़्यादा और फालतू बातें करता था। वह अक्सर उन चीज़ों के बारे में भी बातें करता था जिसके बारे में उसे कुछ पता नहीं होता था।
एक बार गाँव के मेले में, अर्जुन ने अपने दोस्तों को प्रभावित करने के लिए कहा, "क्या तुम्हें पता है? उस पुराने पेड़ के पीछे एक जादुई खजाना छिपा है!" उसके दोस्त हैरान रह गए, लेकिन पास बैठे एक बुजुर्ग व्यक्ति बस मुस्कुरा दिए। धीरे-धीरे, अर्जुन दूसरों की बुराई करने और बेकार की बातें करने लगा। जल्द ही, उसके दोस्त उससे दूर होने लगे क्योंकि उसे सुनना उबाऊ हो गया था।
शाम को उसके दादाजी ने उसे समझाया, "अर्जुन, शब्द कीमती होते हैं। यदि तुम कुछ सार्थक नहीं कह सकते, तो चुप रहना ही सबसे अच्छा है। बुद्धिमान व्यक्ति व्यर्थ की बातों में अपना समय नष्ट नहीं करते।"
अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि बिना मतलब की बातें करने से लोग दूर हो जाते हैं। उस दिन के बाद, अर्जुन बोलने से पहले सोचने लगा और उसकी बातें अब सबकी मदद करने वाली और सच्ची होने लगीं।