एक सुंदर से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत ही ऊर्जावान था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह बहुत ज़्यादा बोलता था। चाहे दोस्तों के साथ खेलना हो या खाना खाना, उसके पास हमेशा कहने के लिए कुछ न कुछ होता था, जो अक्सर बेकार की बातें या गपशप होती थीं।
एक दिन, लियो गाँव के सबसे बुद्धिमान बुजुर्ग, दादाजी शिलास के पास गया। शिलास एक शांत झील के किनारे बैठे थे। लियो दौड़कर उनके पास गया और बिना रुके बेकार की बातें बताने लगा, 'दादाजी, दादाजी! क्या आपने सुना आज बाज़ार में क्या हुआ?'
शिलास ने मुस्कुराते हुए कहा, 'लियो, पहले इस झील को देखो।' उन्होंने एक छोटा सा कंकड़ उठाया और झील में फेंक दिया। टप! एक छोटी सी लहर उठी और गायब हो गई। 'इससे क्या हुआ?' शिलास ने पूछा। 'बस थोड़ा सा शोर हुआ,' लियो ने कहा।
फिर शिलास ने एक बड़ा और भारी पत्थर उठाया और उसे झील में फेंका। छपाक! पानी में बड़ी लहरें उठीं और काफी देर तक हलचल होती रही। शिलास ने समझाया, 'लियो, तुम्हारे शब्द भी इन पत्थरों की तरह हैं। अगर तुम बिना मतलब की बातें करते हो, तो वे इस छोटे कंकड़ की तरह हैं—सिर्फ थोड़ा शोर करते हैं और खत्म हो जाते हैं। लेकिन अगर तुम समझदारी भरी बातें करते हो, तो वे इस बड़े पत्थर की तरह हैं—उनका प्रभाव गहरा होता है। बुद्धिमान लोग वे शब्द नहीं बोलते जिनका कोई महत्व न हो।'
लियो को अपनी गलती समझ आ गई। उस दिन के बाद, वह बोलने से पहले सोचने लगा कि क्या उसके शब्द सार्थक हैं या सिर्फ शोर।