एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास बस एक छोटा सा खेत और एक बैल था। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। रामू की सारी जमा पूँजी खत्म हो गई। वह बहुत चिंतित रहने लगा कि अपने परिवार का पेट कैसे पालेगा।
एक दिन, रामू ने देखा कि गाँव के एक बुजुर्ग अपनी कीमती सोने की घड़ी खो जाने के कारण बहुत परेशान हैं। रामू को वह घड़ी ज़मीन पर पड़ी मिली। एक पल के लिए उसके मन में लालच आया, 'मैं बहुत गरीब हूँ, अगर मैं इस घड़ी को बेच दूँ, तो मेरा परिवार खुशहाल हो जाएगा।' उसने अपनी गरीबी को गलत काम करने का बहाना बनाना चाहा।
लेकिन तभी उसकी अंतरात्मा ने उसे झकझोर दिया। उसने सोचा, 'गरीब होने का बहाना बनाकर चोरी करना गलत है, इससे मैं और भी बुरा बन जाऊँगा।' उसने वह घड़ी उस बुजुर्ग को लौटा दी। बुजुर्ग रामू की ईमानदारी से इतने खुश हुए कि उन्होंने रामू के खेत के लिए बीज और खाद का सारा खर्च उठाने का फैसला किया।
कुछ समय बाद बारिश हुई और रामू का खेत लहलहा उठा। अगर उसने गलत रास्ता चुना होता, तो वह आज और भी बड़ी मुसीबत में होता।