एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत शरारती था और दूसरों को परेशान करके उसे मज़ा आता था। उसका दोस्त रवि बहुत सीधा और शांत लड़का था। एक दिन, रवि ने बहुत मेहनत से मिट्टी का एक सुंदर घर बनाया था। अर्जुन ने खेल-खेल में उसे लात मारकर तोड़ दिया। रवि रोने लगा, लेकिन अर्जुन हँसते हुए बोला, "अरे, यह तो बस मिट्टी है, रो क्यों रहे हो?"
उसी शाम, अर्जुन अपने नए खिलौने के साथ बगीचे में दौड़ रहा था। दौड़ते समय उसका ध्यान नहीं रहा और वह एक कँटीली झाड़ी से टकरा गया। झाड़ियों के काँटों ने उसके पैर में चुभकर उसे बहुत दर्द दिया और उसका खिलौना भी टूट गया। अर्जुन दर्द से रोने लगा। तभी पास से गुजर रहे एक बुजुर्ग ने कहा, "अर्जुन, जो दुख तुम दूसरों को देते हो, वही दुख लौटकर तुम्हारे पास भी आता है। अगर तुम नहीं चाहते कि तुम्हें दुख हो, तो दूसरों को दुख मत दो।"
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। अगले दिन वह रवि के पास गया और उससे माफी मांगी। फिर दोनों ने मिलकर मिट्टी का एक बड़ा घर बनाया। अर्जुन को आज बहुत सुकून महसूस हो रहा था।