एक सुंदर से गाँव में आर्यन अपने दादाजी के साथ रहता था। एक साल गाँव में बहुत भीषण सूखा पड़ा। नदियाँ और तालाब सूख गए, जिससे सभी लोग और जानवर प्यासे रहने लगे। आर्यन यह सब देखकर बहुत दुखी था।
एक शाम आर्यन ने अपने दादाजी से पूछा, 'दादाजी, बादल हमें बारिश देते हैं, पर क्या बादल कभी बदले में हमसे कुछ मांगते हैं?'
दादाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बेटा आर्यन, बादलों को देखो। वे धरती को जीवन देने के लिए बारिश बरसाते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ने बादलों से पूछा है कि वे बदले में क्या लेंगे? नहीं! बादल अपना कर्तव्य निभाते हैं, बिना किसी स्वार्थ के।'
दादाजी की बात सुनकर आर्यन के मन में एक विचार आया। उसने अपनी छोटी सी बचत से मिट्टी के कुछ पात्र खरीदे और गाँव में जहाँ भी पक्षी या छोटे जानवर प्यासे दिखते, वहाँ पानी भर देता। उसने यह काम किसी प्रशंसा या इनाम के लिए नहीं किया। कुछ दिनों बाद बारिश हुई और गाँव फिर से हरा-भरा हो गया। आर्यन को समझ आया कि बिना किसी बदले की उम्मीद के दूसरों की मदद करने में जो सुकून है, वह सबसे बड़ा है।