एक शांत गाँव में सैमुअल नाम का एक बहुत अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत सारी ज़मीन, पशु और धन था। लेकिन सैमुअल बहुत कंजूस था। वह मानता था कि धन केवल संचय करने के लिए होता है, दूसरों की मदद के लिए नहीं।
उसी गाँव में डेविड नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास धन तो कम था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें सूख गईं और लोग भोजन के लिए तरसने लगे। सैमुअल ने अपने अनाज के भंडार को ताले में बंद कर लिया ताकि कोई उसे मांग न सके।
लेकिन डेविड ने अपने पास बचे थोड़े से अनाज को भी गाँव के भूखे लोगों और बच्चों के साथ बाँट दिया। कुछ समय बाद, गाँव में एक बीमारी फैल गई। भूख के कारण लोग कमज़ोर हो गए थे, जिससे बीमारी और गंभीर हो गई। डेविड ने अपनी थोड़ी सी बचत से दवाइयाँ और भोजन खरीदा और बीमारों की मदद की। डेविड की उस छोटी सी मदद ने गाँव के कई लोगों की जान बचा ली। वह धन, जो उसने दूसरों के लिए खर्च किया था, एक जीवन रक्षक औषधि की तरह काम आया। यह देखकर सैमुअल को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि धन का असली महत्व तभी है जब वह किसी के काम आए, ठीक वैसे ही जैसे एक औषधीय पेड़ बीमारों को ठीक करता है।