एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक दयालु किसान रहता था। वह बहुत ही परोपकारी था। लेकिन एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे सोमू की सारी फसल बर्बाद हो गई। उसके पास जो अनाज बचा था, वह भी धीरे-धीरे खत्म होने लगा। यह देखकर उसके पड़ोसी रवि ने कहा, 'अब सोमू गरीब हो गया है, अब वह किसी की मदद नहीं कर पाएगा।'
कुछ दिनों बाद, सोमू के छोटे बेटे अकिली ने गलती से एक गरीब मजदूर के बगीचे के पौधों को नुकसान पहुँचा दिया। मजदूर बहुत दुखी होकर सोमू के पास आया। सोमू के पास खुद के परिवार के लिए भी बहुत कम अनाज बचा था, फिर भी उसने बिना सोचे अपने हिस्से का थोड़ा सा अनाज उस मजदूर को दे दिया। वह बहुत बड़ी राशि नहीं थी, लेकिन उस मजदूर के लिए वह बहुत कीमती थी।
रवि ने यह देखा और पूछा, 'जब तुम्हारे पास खुद के लिए ही पर्याप्त नहीं है, तो तुम दूसरों की मदद क्यों कर रहे हो?' सोमू ने शांति से उत्तर दिया, 'रवि, गरीबी केवल धन की कमी नहीं है, बल्कि दूसरों की मदद करने की इच्छा का न होना ही असली गरीबी है। हो सकता है कि मेरे पास देने के लिए बहुत कुछ न हो, लेकिन मेरे मन में देने की भावना हमेशा रहेगी।'
रवि को सोमू की बात समझ आ गई। उसने महसूस किया कि इंसान की महानता उसके धन से नहीं, बल्कि उसके उदार हृदय से मापी जाती है।