एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का और उसके पिता सैमुअल रहते थे। सैमुअल एक किसान थे। एक साल गाँव में सूखा पड़ा और उनके घर का अनाज बहुत कम हो गया। एक शाम, एक बूढ़ा व्यक्ति भूख और प्यास से बेहाल होकर उनके दरवाजे पर आया।
लियो दौड़कर अपने पिता के पास गया और बोला, "पिताजी, वह बुजुर्ग बहुत भूखे लग रहे हैं, क्या हम उन्हें खाना दे सकते हैं?" सैमुअल के मन में एक पल के लिए दुविधा हुई। उन्होंने सोचा, 'हमारे पास तो खुद के लिए बहुत कम है, क्या हम यह कहकर उन्हें टाल दें कि हमारे पास कुछ नहीं है?'
लेकिन जब उन्होंने लियो की मासूम आँखों में देखा, तो उनका हृदय पिघल गया। उन्होंने कहा, "लियो, हमारे पास कम है तो क्या हुआ, 'मेरे पास कुछ नहीं है' कहकर पीछे हट जाना कायरता है। जो अभाव में भी देता है, वही महान है।" सैमुअल ने अपने भोजन का एक हिस्सा उस बुजुर्ग को दे दिया। बुजुर्ग के चेहरे की मुस्कान देखकर लियो को बहुत खुशी हुई। उसने सीखा कि महानता धन से नहीं, बल्कि बड़े दिल से आती है।