एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन का दिल बहुत कोमल था। एक दिन, स्कूल से घर लौटते समय, उसने राघव नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति को सड़क किनारे बहुत दुखी बैठा देखा। राघव जी अपनी जमापूंजी वाला बटुआ खो जाने के कारण बहुत परेशान थे।
अर्जुन उनके पास गया और उनकी बात सुनी। बुजुर्ग की उदासी देखकर अर्जुन का मन भर आया। उसने अपना दोपहर का भोजन उनके साथ साझा किया। अगले दिन, अर्जुन ने अपने खिलौने के लिए बचाए हुए पैसों में से कुछ पैसे निकालकर राघव जी को दिए और कहा, 'दादाजी, आप चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा।'
अर्जुन की इस दयालुता ने राघव जी के चेहरे पर मुस्कान ला दी। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव अर्जुन के भीतर आया। क्योंकि अर्जुन का मन दया और करुणा से भरा था, वह कभी भी स्वार्थ या निराशा के अंधेरे में नहीं डूबा। उसकी दयालुता ने उसके जीवन को हमेशा खुशियों के प्रकाश से भर दिया।