एक शांत गाँव में ईथन नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। गाँव के किनारे एक छोटी सी कुटिया थी, जहाँ सीलास नाम के एक साधु रहते थे। उन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया था और तपस्या में लीन थे। एक दिन, ईथन की माँ, क्लारा, ताजे फल और भोजन लेकर कुटिया की ओर चल दीं। ईथन भी उनके साथ गया।
जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि साधु सीलास बहुत कमजोर लग रहे थे। तपस्या के कारण उन्होंने कई दिनों से बहुत कम भोजन किया था। क्लारा ने जब उन्हें भोजन दिया, तो साधु के चेहरे पर एक दिव्य शांति दिखाई दी। ईथन यह देखकर हैरान था।
वापस आते समय ईथन ने पूछा, 'माँ, साधु तो तपस्या कर रहे हैं, फिर हम उनकी मदद क्यों कर रहे हैं?' क्लारा ने प्यार से समझाया, 'बेटा, साधु का तप उनकी साधना है। लेकिन उनका ध्यान केंद्रित रखने के लिए उन्हें भोजन और सहायता प्रदान करना हमारा कर्तव्य है। जो लोग ईश्वर की खोज में हैं, उनकी सेवा करना भी हमारे लिए एक महान तपस्या है।' ईथन समझ गया कि दूसरों की भलाई करना ही सबसे बड़ा धर्म है।