एक घने जंगल के किनारे अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी सोमनाथ के साथ रहता था। अर्जुन बहुत होनहार था, लेकिन उसे एक समस्या थी—वह अपने गुस्से और भावनाओं पर काबू नहीं रख पाता था। छोटी सी बात पर वह चिल्लाने लगता था।
एक दिन जंगल में एक छोटा हिरण दो भारी पत्थरों के बीच फंस गया। उसे देखकर अन्य जानवर डरकर भागने लगे और शोर मचाने लगे। अर्जुन भी घबरा गया और रोने लगा। लेकिन दादाजी सोमनाथ बिल्कुल शांत रहे। उन्होंने एक गहरी सांस ली और अपने मन को स्थिर किया। बिना घबराए, उन्होंने बहुत धैर्य के साथ पत्थरों को हटाया और हिरण को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
अर्जुन ने हैरान होकर पूछा, 'दादाजी, आप इतने शांत कैसे रहे?' दादाजी ने मुस्कुराकर कहा, 'बेटा, जब दुनिया में चारों ओर उथल-पुथल हो, तब जो अपने मन को शांत रखना सीख जाता है, वही असली शक्तिशाली है। जो अपने आप पर विजय पा लेता है, पूरी दुनिया उसका सम्मान करती है।' उस दिन के बाद से अर्जुन ने अपने मन को वश में करना सीखा। जैसे-जैसे वह शांत रहने लगा, जंगल के जीव भी उसे सम्मान की दृष्टि से देखने लगे।