एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता गाँव के मंदिर के पुजारी थे। अर्जुन हमेशा साफ सफेद कपड़े पहनता और मंदिर में बहुत ही भक्ति भाव से बैठता था। गाँव के लोग उसे देखकर कहते, 'देखो, यह लड़का कितना संस्कारी और पवित्र है!' लेकिन एक दिन, अपने दोस्त रोहन के साथ खेलते समय, अर्जुन से अनजाने में रोहन का पसंदीदा खिलौना टूट गया। डर के मारे, उसने खिलौना एक झाड़ी के पीछे छिपा दिया और कुछ नहीं हुआ जैसे बना रहा। उस शाम मंदिर में वह बहुत शांत और धार्मिक दिख रहा था, लेकिन उसके मन में बहुत बेचैनी थी। उसे लग रहा था कि बाहर से पवित्र दिखने का क्या फायदा, अगर मन में एक झूठ छिपा है। अंत में, अर्जुन ने रोहन को सब सच बता दिया और माफी मांगी। तभी उसके मन को सच्ची शांति मिली।
अर्जुन ने सीखा कि केवल बाहरी दिखावा पवित्रता नहीं है, असली पवित्रता मन की सच्चाई में है।