एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उसी गाँव में साइलस नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह हमेशा सफेद कपड़े पहनता और बहुत ही शांत स्वभाव का होने का नाटक करता। गाँव के लोग समझते थे कि उसने संसार की सभी इच्छाओं का त्याग कर दिया है और वे उसकी बहुत पूजा करते थे।
लेकिन साइलस के मन में एक गहरा राज था। बाहर से शांत दिखने के बावजूद, उसके मन में धन और प्रसिद्धि का बहुत लालच था। एक बार गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें बर्बाद हो गईं और लोग भूख से तड़पने लगे। जब भूखे लोग मदद के लिए साइलस के पास पहुँचे, तो उसने बड़ी गंभीरता से कहा, 'मैंने तो सब कुछ त्याग दिया है, मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है।' लेकिन लियो ने देखा कि साइलस ने अपने पीछे सोने के सिक्कों से भरी थैली को कसकर पकड़ रखा था। वह संन्यासी होने का नाटक सिर्फ इसलिए कर रहा था ताकि उसे अपना धन बांटना न पड़े।
दूसरी ओर, लियो के दादाजी के पास बहुत कम अनाज था, फिर भी उन्होंने बिना किसी दिखावे के वह अनाज गाँव के भूखे लोगों में बाँट दिया। दादाजी का हृदय वास्तव में दयालु था। धीरे-धीरे गाँव वालों को पता चल गया कि साइलस केवल दिखावा कर रहा है। उन्होंने सीखा कि वे लोग सबसे कठोर हृदय के होते हैं जो मन में लालच रखकर भी त्याग का ढोंग करते हैं।