एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन हमेशा बहुत साफ-सुथरा रहता था। वह रोज़ नहाता और अपने कपड़े हमेशा साफ रखता था। गाँव के लोग उसे देखकर कहते थे, 'देखो, अर्जुन कितना स्वच्छ लड़का है!'
एक दिन, घर में खेलते समय अर्जुन से गलती से अपने पिता का लकड़ी का डिब्बा गिर गया और उसमें से एक छोटा सोने का सिक्का खो गया। डर के मारे अर्जुन ने अपने पिता से झूठ बोल दिया कि उसे कुछ नहीं पता।
उस रात अर्जुन को नींद नहीं आई। हालाँकि उसने स्नान किया था और उसका शरीर साफ था, लेकिन उसे महसूस हुआ कि उसका मन गंदा हो गया है। उसके सीने में एक भारीपन था। अगले दिन सुबह, अर्जुन अपने पिता के पास गया और रोते हुए बोला, 'पिताजी, मुझे माफ कर दीजिए, वह सिक्का मुझसे ही खो गया था।'
सत्य बोलते ही अर्जुन का मन हल्का हो गया। उसे ऐसा लगा जैसे उसके भीतर की सारी गंदगी धुल गई हो। उसने सीखा कि शरीर को साफ करने के लिए पानी काफी है, लेकिन मन की पवित्रता के लिए केवल सत्य ही काम आता है।