एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। अर्जुन बहुत होनहार था, लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी। जब भी वह खेल-खेल में ऊब जाता या उसे गुस्सा आता, वह छोटे कीड़े-मकौड़ों को पकड़कर मार देता था। एक दोपहर, उसने एक सुंदर तितली को देखा। उसने उसे अपने हाथों में पकड़ लिया और जब तितली उड़ने की कोशिश करने लगी, तो उसने उसे ज़ोर से दबा दिया और हंसने लगा।
उसके दादाजी ने यह सब देख लिया और अर्जुन को अपने पास बुलाया। 'अर्जुन, तुमने ऐसा क्यों किया?' उन्होंने प्यार से पूछा।
'दादाजी, यह तो बस एक तितली है, इससे क्या फर्क पड़ता है?' अर्जुन ने कहा।
दादाजी ने उसे समझाते हुए कहा, 'बेटा, एक इंसान का चरित्र कैसा है, यह इस बात से पता चलता है कि वह बेज़ुबान जीवों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जो लोग किसी को नुकसान पहुँचाने या मारने में आनंद महसूस करते हैं, उनका मन बहुत नीच होता है। सच्चा इंसान वही है जो हर जीव के दर्द को महसूस कर सके।'
दादाजी की बात अर्जुन के दिल को छू गई। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उस दिन के बाद, अर्जुन ने कभी किसी छोटे जीव को नुकसान नहीं पहुँचाया। उसने सीखा कि असली ताकत दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करने में है।