एक सुंदर घाटी में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन को मीठे फल, रंग-बिरंगी तितलियाँ और नए खिलौने बहुत पसंद थे। उसे लगता था कि खुशी केवल इन्हीं चीजों में है।
एक दिन, वेद नाम के एक ज्ञानी महात्मा उस गाँव में आए। अर्जुन ने देखा कि वे बहुत शांत थे। अर्जुन उनके पास गया और पूछा, 'महाराज, आपके पास न खिलौने हैं न मिठाई, फिर भी आप इतने खुश कैसे हैं?'
वेद मुस्कुराए और बोले, 'बेटा, सच्ची खुशी चीजों को पकड़ने में नहीं, बल्कि उन्हें छोड़ने में है। जब तुम्हारी इंद्रियाँ और मन केवल सुख और पुरानी इच्छाओं के पीछे भागना बंद कर देंगे, तभी तुम्हें असली शांति मिलेगी।'
कुछ दिनों बाद, अर्जुन का सबसे प्रिय खिलौना टूट गया। पहले वह बहुत रोता था, लेकिन उस दिन उसने महात्मा की बात याद की। उसने खिलौने के लिए दुखी होना छोड़ दिया और आसमान की सुंदरता देखने लगा। उसे महसूस हुआ कि मन का बोझ उतर गया है और वह हल्का महसूस कर रहा है।