एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो को हर नई चीज़ पाने की बहुत इच्छा होती थी—चाहे वह सुंदर खिलौने हों या मीठी मिठाइयाँ। उसे लगता था कि जितना अधिक वह पाता है, उसकी इच्छा उतनी ही बढ़ती जाती है, जिससे वह हमेशा बेचैन रहता था।
एक दिन नदी के किनारे टहलते हुए, लियो की मुलाकात क्लारा नाम की एक बुद्धिमान वृद्ध महिला से हुई। लियो की बेचैनी देखकर उन्होंने पूछा, "लियो, तुम इतने परेशान क्यों दिख रहे हो?"
"मुझे सब कुछ चाहिए, क्लारा!" लियो ने उदास होकर कहा। "लेकिन जितना मैं पाता हूँ, मेरी इच्छाएँ उतनी ही बढ़ती जाती हैं।"
क्लारा मुस्कुराईं और बोलीं, "लियो, यदि तुम वास्तव में कुछ पाना चाहते हो, तो ऐसी स्थिति पाने की इच्छा करो जहाँ कोई इच्छा न हो। यदि तुम इच्छाओं से मुक्त होने की इच्छा करोगे, तो तुम्हारी सारी इच्छाएँ अपने आप समाप्त हो जाएँगी और तुम्हें परम शांति मिलेगी।"
लियो ने उनकी बात मान ली। अगले दिन, जब उसने एक सुंदर खिलौना देखा, तो उसे उसे पाने की तीव्र इच्छा हुई। लेकिन उसने खुद को रोका और सोचा, 'मुझे चीज़ों की नहीं, बल्कि संतोष की इच्छा है।' धीरे-धीरे वह लालच कम होने लगा। उसने महसूस किया कि जब उसने चीज़ों के पीछे भागना छोड़ दिया, तो उसे एक अनोखी खुशी और शांति मिली।