एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का अपने पिता, रामू के साथ रहता था। रामू एक मेहनती किसान था जो बहुत ही संतोषी स्वभाव का था। लेकिन आर्यन हमेशा कुछ न कुछ नया पाने की चाह में रहता था। उसे लगता था कि अगर उसके पास महँगे खिलौने और सुंदर कपड़े होते, तो वह दुनिया का सबसे सुखी बच्चा होता।
एक दिन गाँव में एक जादूगर आया। उसने एक 'चमकता हुआ पत्थर' दिखाया और कहा कि जो भी इस पत्थर को चाहेगा, उसकी हर इच्छा पूरी हो जाएगी। आर्यन की आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा, 'अब मुझे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होगी!'
लेकिन जैसे ही आर्यन ने उस पत्थर के बारे में सोचना शुरू किया, उसकी बेचैनी बढ़ गई। उसे अपने पास मौजूद चीज़ें बेकार लगने लगीं। वह रात भर बस यही सोचता कि उसे और बड़ा घर, और ज़्यादा खिलौने चाहिए। पर अजीब बात यह थी कि जितनी उसकी इच्छाएँ बढ़तीं, उतना ही उसका मन उदास होता जाता। उसे नींद आना भी मुश्किल हो गया।
रामू ने आर्यन की उदासी देखी और उसे पास बिठाकर समझाया, 'बेटा, इच्छा एक आग की तरह है। तुम इसमें जितना घी डालोगे, यह उतनी ही बढ़ती जाएगी और अंत में तुम्हें ही जला देगी। असली सुख पाने में नहीं, बल्कि जो है उसमें संतुष्ट रहने में है।'
आर्यन को बात समझ आ गई। उसने महसूस किया कि अगर उसे वह पत्थर मिल भी जाता, तो वह और भी बड़ी चीज़ों की चाह करने लगता। वह कभी शांत नहीं रह पाता। उसने अपनी इच्छाओं पर काबू पाना सीखा और अपने पिता के साथ छोटी-छोटी खुशियों में जीना शुरू किया। धीरे-धीरे उसका मन शांत हो गया।