एक सुंदर गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास आमों का एक बड़ा बगीचा था। जब फसल अच्छी होती और मौसम सुहावना होता, तो रामू बहुत खुश रहता था। वह गर्व से कहता, 'मैं कितना भाग्यशाली हूँ! ईश्वर ने मुझे कितना कुछ दिया है!'
लेकिन एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं और रामू के आम के पेड़ मुरझाने लगे। रामू की खुशी गायब हो गई। वह गहरे दुख में डूब गया और रोते हुए कहने लगा, 'मेरी किस्मत ही खराब है! मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?' उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया।
तभी गाँव के एक बुजुर्ग, दादाजी, उसके पास आए। उन्होंने रामू के सिर पर हाथ रखा और कहा, 'बेटा रामू, जब अच्छे दिन थे, तब तुम बहुत नाच रहे थे। लेकिन अब जब बुरा समय आया है, तो तुम इतने टूट क्यों गए हो? अच्छे और बुरे दोनों समय भाग्य का ही हिस्सा हैं। समय एक पहिए की तरह है जो घूमता रहता है। अच्छे समय में अहंकार मत करो और बुरे समय में हिम्मत मत हारो।'
रामू को अपनी गलती समझ आ गई। उसने जान लिया कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। उसने सीखा कि खुशियों में विनम्र रहना चाहिए और दुखों में धैर्य रखना चाहिए।