बहुत समय पहले की बात है, पहाड़ों के पास बसे एक राज्य में आदित्य नाम का एक राजकुमार रहता था। उसके राज्य में भीषण सूखा पड़ा था और लोग भोजन और पानी के लिए तरस रहे थे। तभी, एक दूर के देश के व्यापारी ने आदित्य के सामने एक प्रस्ताव रखा। उसने कहा, 'मैं तुम्हारे लोगों को सारा अनाज और पानी दे दूँगा, लेकिन बदले में तुम्हें अपने राज्य के पवित्र जंगल का अधिकार मुझे देना होगा।' \आदित्य सोच में पड़ गया। यदि वह जंगल दे देता, तो लोगों को तुरंत भोजन मिल जाता, लेकिन वह जंगल राज्य की आत्मा था। गलत तरीके से धन या संसाधन प्राप्त करना आसान था, लेकिन आदित्य जानता था कि यह उसके सम्मान और धर्म के विरुद्ध होगा। उसने सोचा, 'एक राजा का कर्तव्य रक्षा करना है, न कि अपनी पवित्रता का सौदा करना।'
आदित्य ने व्यापारी का प्रस्ताव ठुकरा दिया। उसने अपने लोगों के साथ मिलकर कड़ी मेहनत करने का निर्णय लिया। उसने नए कुएँ खुदवाए और नदियों से पानी लाने के लिए नहरें बनाईं। यह रास्ता कठिन था, लेकिन उसने कभी भी गलत रास्ता नहीं चुना। अंत में, मेहनत रंग लाई और बारिश भी हुई। आदित्य ने साबित कर दिया कि सच्चे नायक वही हैं जो कठिन समय में भी अपने आदर्शों और धर्म का त्याग नहीं करते।