एक सुंदर से गाँव में अनबरसु नाम का एक लड़का रहता था। उसे चीज़ें इकट्ठा करने का बहुत शौक था। रंगीन पत्थर, लकड़ी के खिलौने या मिठाइयाँ—जो भी उसे मिलता, वह उसे अपने बक्से में भर लेता था।
एक दिन उसके दादाजी ने उसे बुलाया और कहा, 'अनबरसु, मैं तुम्हारे लिए एक बहुत बड़ा खजाना लाया हूँ।' अनबरसु की आँखें चमक उठीं। उसने सोचा कि शायद बक्से में सोने के सिक्के या हीरे होंगे। लेकिन जब उसने बक्सा खोला, तो उसमें केवल कुछ पुरानी किताबें थीं। वह उदास हो गया और बोला, 'दादाजी, इन किताबों का क्या फायदा? खिलौने टूट जाते हैं और मिठाइयाँ खत्म हो जाती हैं, पर ये किताबें क्या करेंगी?'
दादाजी ने प्यार से समझाया, 'बेटा, जो खिलौने तुम जमा कर रहे हो, वे एक दिन टूट जाएँगे। जो मिठाइयाँ तुम खा रहे हो, वे खत्म हो जाएँगी। लेकिन इन किताबों में जो ज्ञान है, उसे न कोई चुरा सकता है और न ही वह कभी खत्म होगा। आज तुम जो सीखोगे, वह जीवन भर तुम्हारे काम आएगा और तुम्हें कभी मुश्किल में नहीं पड़ने देगा।'
अनबरसु ने किताबें पढ़ना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ और गाँव का सबसे बड़ा डॉक्टर बना। एक बार जब गाँव में बीमारी फैली, तो उसके ज्ञान ने ही लोगों की जान बचाई। तब उसे समझ आया कि दादाजी सही थे—शिक्षा ही वह धन है जो हमेशा साथ रहता है।