एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे पढ़ने का बहुत शौक था। एक शाम उसने अपने दादाजी से पूछा, 'दादाजी, अगर मैं बहुत पढ़ाई करूँ और बहुत ज्ञानी बन जाऊँ, तो क्या मेरा ज्ञान सिर्फ मुझे ही खुशी देगा?'
दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'अर्जुन, जब तुम एक दीया जलाते हो, तो उसकी रोशनी तुम्हें तो दिखती ही है, पर वह कमरे में मौजूद बाकी लोगों को भी रास्ता दिखाती है। ज्ञान भी वैसा ही है।'
कुछ ही हफ्तों में, अर्जुन ने स्कूल में सीखी हुई बातें गाँव वालों को बताना शुरू कर दिया। उसने किसानों को खेती के कुछ नए तरीके बताए और बुजुर्गों को हिसाब-किताब करने के आसान तरीके सिखाए। जब उसने देखा कि गाँव के लोग उसकी बातों से बहुत खुश हैं और उनका काम आसान हो रहा है, तो अर्जुन का मन उत्साह से भर गया।
यह देखकर कि उसकी छोटी सी जानकारी से दूसरों को कितना लाभ हो रहा है, अर्जुन के मन में और अधिक सीखने की इच्छा जागी। उसने सोचा, 'अगर मैं और अधिक जानूँगा, तो मैं और भी अधिक लोगों की मदद कर सकूँगा।' अब वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए सीखना चाहता था।