एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बातें करना बहुत पसंद था, लेकिन उसे पढ़ाई करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। एक दिन, गाँव में एक बहुत बड़े विद्वान आए। वे बहुत ज्ञानी थे और बहुत सारी बातें जानते थे।
जब विद्वान गाँव वालों को कुछ समझा रहे थे, तो अर्जुन बार-बार बीच में बोलने लगा। वह अपनी छोटी सी जानकारी को बड़े गर्व से दिखाने की कोशिश करता, जिससे विद्वान की बात पूरी नहीं हो पाती थी। अर्जुन के पिता ने उसे अकेले में बुलाया और समझाया, 'बेटा, जब ज्ञानी लोग बोल रहे हों, तो चुपचाप सुनना ही सबसे बड़ी समझदारी है।'
अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। अगली बार जब विद्वान आए, तो अर्जुन बिल्कुल चुप रहा और बहुत ध्यान से उनकी बातें सुनीं। उस शांति के कारण वह बहुत कुछ नया सीख पाया। विद्वान ने अर्जुन की इस शालीनता को देखकर उसे बहुत प्यार दिया और उसे ज्ञान की नई बातें सिखाईं। अर्जुन समझ गया कि चुप रहकर ही हम सबसे ज्यादा सीख सकते हैं।