एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे सजने-संवरने का बहुत शौक था। वह हमेशा महंगे कपड़े और चमकते हुए गहने पहनता था। उसका दोस्त रोहन बहुत ही साधारण था, लेकिन वह हमेशा किताबों में खोया रहता था।
एक दिन गाँव में एक विद्वान आए। उन्होंने एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की घोषणा की और कहा कि जो जीतेगा उसे सोने का पदक मिलेगा। अर्जुन को पूरा भरोसा था कि वह जीत जाएगा क्योंकि वह दिखने में बहुत प्रभावशाली था।
लेकिन जब प्रतियोगिता शुरू हुई, तो अर्जुन को एक भी उत्तर नहीं पता था। उसकी सुंदरता उसे उत्तर नहीं बता सकी। वहीं रोहन ने अपनी पढ़ाई के दम पर सभी सवालों के सही जवाब दिए और प्रतियोगिता जीत ली।
शाम को अर्जुन बहुत उदास था। उसके दादाजी ने उसे पास बिठाया और समझाया, 'बेटा, तुम दिखने में बहुत सुंदर हो, लेकिन बिना ज्ञान के यह सुंदरता मिट्टी की उस गुड़िया जैसी है जिस पर रंग तो चढ़ा है, पर उसमें न जान है और न ही वह कुछ बोल सकती है। ज्ञान ही इंसान को असली पहचान देता है।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उस दिन के बाद उसने सजने के बजाय पढ़ने पर ध्यान देना शुरू कर दिया।