एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। दूसरे बच्चों की तरह वह स्कूल नहीं जा पाता था क्योंकि उसे अपने पिता के साथ खेतों में काम करना पड़ता था। लेकिन करी की एक बहुत अच्छी आदत थी। गाँव के बुजुर्ग, माणिक दादा, रोज़ शाम को एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर दुनिया भर की बातें और अनुभव साझा करते थे। जब बाकी बच्चे खेल रहे होते, करी चुपचाप दादाजी के पास बैठकर उनकी हर बात बड़े ध्यान से सुनता था.
एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं और फसलें बर्बाद हो गईं। करी के परिवार को भी पानी की बहुत किल्लत होने लगी। एक शाम, करी को दादाजी की कही हुई एक बात याद आई। दादाजी ने बताया था कि पथरीली पहाड़ियों के पास ज़मीन के नीचे पानी कहाँ मिल सकता है। करी ने अपने पिता से कहा, 'पिताजी, दादाजी ने बताया था कि अगर हम उस पुरानी सूखी नदी के पास खुदाई करें, तो हमें पानी मिल सकता है।'
पिता ने उसकी बात मान ली और वहाँ खुदाई की। देखते ही देखते वहाँ से पानी का सोता फूट पड़ा। उस पानी ने पूरे गाँव की प्यास बुझाई और फसलों को बचाया। करी पढ़ा-लिखा तो नहीं था, लेकिन दूसरों की बातों को सुनने की उसकी आदत संकट के समय उसके लिए एक सहारा बन गई।