एक सुंदर पहाड़ी गाँव में कार्तिक नाम का एक लड़का रहता था। एक दिन अपने दोस्तों के साथ पहाड़ी रास्ते पर खेलते समय अचानक तेज़ बारिश होने लगी। रास्ता बहुत फिसलन भरा हो गया। कार्तिक तेज़ी से दौड़ने लगा, लेकिन अचानक उसका पैर फिसल गया और वह ढलान से नीचे गिरने ही वाला था।
तभी दूर से उसके दादाजी, श्री राघव ने चिल्लाकर कहा, "कार्तिक, रुको! धीरे चलो और सूखी चट्टानों पर पैर रखो!"
दादाजी के उन शांत और स्पष्ट शब्दों ने कार्तिक के लिए एक सहारा बनाया। उन शब्दों को सुनकर कार्तिक ने घबराने के बजाय सावधानी से कदम बढ़ाना शुरू किया और सुरक्षित घर पहुँच गया। उस रात कार्तिक ने दादाजी से पूछा, "दादाजी, आपके शब्दों ने मुझे कैसे बचाया?"
दादाजी मुस्कुराए और बोले, "कार्तिक, जीवन इस फिसलन भरी राह की तरह कभी-कभी कठिन हो जाता है। ऐसे समय में, एक नेक इंसान के शब्द उस लाठी की तरह होते हैं जो फिसलन भरी जगह पर हमें सहारा देती है। वे हमें गिरने से बचाते हैं।" कार्तिक समझ गया कि बुद्धिमान लोगों की बात सुनना और खुद भी हमेशा सच और भलाई की बातें करना कितना ज़रूरी है।