एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक किसान रहता था। अर्जुन बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी एक कमी थी—वह समस्याओं के आने का इंतज़ार करता था, उनके लिए पहले से तैयारी नहीं करता था।
एक दिन उसका मित्र विक्रम उसके पास आया। विक्रम बहुत समझदार था। उसने अर्जुन को चेतावनी दी, 'अर्जुन, बारिश का मौसम आने वाला है। तुम्हें अपने खेतों में जल निकासी के लिए छोटी नालियाँ बना लेनी चाहिए, वरना पानी भरने से फसलें सड़ जाएँगी।'
अर्जुन हँसकर बोला, 'अभी क्यों चिंता करना? जब बारिश आएगी, तब देख लेंगे!' विक्रम ने कहा, 'मुसीबत आने से पहले ही उसका समाधान ढूँढना बुद्धिमानी है।'
कुछ ही दिनों बाद, बहुत तेज़ बारिश हुई। अर्जुन के खेत पानी से भर गए और उसकी फसलें डूबने लगीं। अर्जुन बहुत परेशान हो गया। तभी विक्रम वहाँ पहुँचा। वह अकेला नहीं था, बल्कि अपने साथ कुछ मेहनती और समझदार लोगों को भी लाया था। उन्होंने तुरंत खेत से पानी निकालने के लिए नालियाँ खोदना शुरू कर दिया।
विक्रम की सूझबूझ और टीम की मेहनत से फसलें बच गईं। अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने भावुक होकर कहा, 'विक्रम, तुमने मुसीबत आने से पहले मुझे सावधान किया और मुसीबत आने पर उसे ठीक करने में मेरी मदद भी की। मुझे तुम जैसे बुद्धिमान मित्रों की हमेशा ज़रूरत है।'