बहुत समय पहले, पसुलूर नामक एक सुंदर राज्य में मारन नाम का एक राजा रहता था। मारन बहुत बहादुर था, लेकिन उसकी एक बड़ी कमी थी: वह बिना सोचे-समझे तुरंत निर्णय ले लेता था। एक दिन, उसे पता चला कि पड़ोसी देश का राजा विक्रम, पसुलूर की उपजाऊ भूमि हड़पने के लिए युद्ध की तैयारी कर रहा है।
यह सुनकर मारन क्रोधित हो गया। उसने अपने बुद्धिमान सलाहकार सोमू से कहा, 'हमें तुरंत युद्ध के लिए निकलना चाहिए! हमें उन्हें रोकना होगा!' सोमू ने शांति से कहा, 'महाराज, हमें पहले अपनी शक्ति का आकलन करना चाहिए। क्या हमारे पास पर्याप्त सैनिक, भोजन और हथियार हैं? क्या हमने दुश्मन की रणनीति समझ ली है? सोच-समझकर कदम उठाना बेहतर होगा।' लेकिन मारन ने उसकी बात नहीं मानी और कहा, 'अगर हम रुकेंगे, तो वे हमें कमजोर समझेंगे!'
मारन अपनी सेना लेकर तुरंत निकल पड़ा। लेकिन रास्ते में उसे एहसास हुआ कि उसके सैनिक थक चुके हैं, रसद (भोजन) कम है और दुश्मन की सेना बहुत शक्तिशाली है। मारन ने अपनी क्षमता और परिस्थितियों का सही मूल्यांकन नहीं किया था। इस जल्दबाजी का फायदा उठाकर राजा विक्रम ने आसानी से हमला कर दिया और मारन को पीछे हटना पड़ा। मारन को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसकी बिना सोचे-समझी गई तैयारी ने दुश्मन को ही जीत दिला दी।