एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक कमी थी—वह बिना सोचे-समझे काम करने की जल्दी में रहता था। एक बार गाँव में एक बड़ी प्रतियोगिता आयोजित की गई। नियम यह था कि जो कोई भी एक ऊंचे और चिकने पेड़ की सबसे ऊपरी टहनी पर लगी छोटी सी घंटी को सबसे पहले छुएगा, वही विजेता कहलाएगा।
जैसे ही प्रतियोगिता शुरू हुई, अर्जुन तेजी से पेड़ की ओर भागा। 'मैं ही जीतूँगा!' चिल्लाते हुए उसने पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की। लेकिन पेड़ बहुत चिकना था। वह जितनी बार चढ़ने की कोशिश करता, फिसलकर नीचे गिर जाता। वह थककर चूर हो गया था।
तभी उसका दोस्त रोहन शांति से वहाँ आया। रोहन भागा नहीं। उसने पहले पेड़ की ऊँचाई देखी, पेड़ की छाल की चिकनाहट को परखा और यह भी देखा कि वह खुद कितना ऊँचा चढ़ सकता है। उसने एक मजबूत बेल और एक छोटी लकड़ी भी साथ ली। रोहन ने बहुत ही सावधानी और योजना के साथ पेड़ पर चढ़ना शुरू किया और घंटी को छू लिया।
अर्जुन हाँफते हुए ज़मीन पर बैठ गया। उसने उदास होकर पूछा, 'तुमने यह इतनी आसानी से कैसे कर लिया?'
रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अर्जुन, मैं सिर्फ तेज़ नहीं भागा। मैंने शुरू करने से पहले यह जाना कि पेड़ कितना फिसलन भरा है और मेरी ताकत कितनी है। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार रास्ता चुना। सिर्फ जोश से नहीं, बल्कि सही योजना और अपनी काबिलियत को जानकर ही जीत मिलती है।'
अर्जुन को समझ आ गया कि केवल साहस काफी नहीं है। उसने सीखा कि किसी भी काम में कूदने से पहले अपनी शक्ति और परिस्थिति को समझना ही असली सफलता की कुंजी है।