एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसे प्रकृति की सुंदर चीजें इकट्ठा करने का बहुत शौक था। एक दिन उसने सोचा कि वह अपने छोटे से लकड़ी के ठेले में सुंदर फूल और पत्तियाँ भरकर गाँव के मेले में ले जाएगा।
आर्यन ने ठेले में कुछ फूल रखे, फिर कुछ और रखे। उसके दोस्त समीर ने कहा, "आर्यन, ठेला काफी भर गया है, अब और मत डालो!" लेकिन आर्यन ने उसकी बात नहीं मानी। उसने सोचा, "अगर मैं और फूल डालूँगा, तो ठेला और भी सुंदर दिखेगा।" उसने ढेर सारे फूल और पत्तियाँ ठेले में भर दीं।
जब आर्यन ठेले को खींचने लगा, तो उसे बहुत जोर लगाना पड़ रहा था। अचानक, एक ज़ोरदार आवाज़ आई और ठेले का धुरी (axle) टूट गया! सारे सुंदर फूल मिट्टी में मिल गए। आर्यन उदास होकर बैठ गया। तभी उसके पिता वहाँ आए और बोले, "बेटा, मोर के पंख बहुत हल्के होते हैं, लेकिन अगर तुम बहुत सारे पंख एक साथ रख दोगे, तो वे ठेले की धुरी को भी तोड़ सकते हैं। जीवन में भी संतुलन और सीमा का होना बहुत ज़रूरी है।"
आर्यन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने सीखा कि लालच और बिना सोचे-समझे किया गया काम नुकसान पहुँचाता है।