एक सुंदर गाँव में अरुण नाम का एक युवक रहता था। अरुण बहुत ही कुशल और मेहनती था, लेकिन उसमें एक कमी थी: उसे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था। उसी गाँव में मणि नाम का एक और युवक रहता था। मणि बहुत शांत स्वभाव का था, लेकिन वह बहुत सुस्त था और किसी भी काम को करने में बहुत समय लगाता था।
गाँव के मुखिया, सोमनाथ जी, को गाँव के नए कुएँ के निर्माण की जिम्मेदारी देने के लिए किसी को चुनना था। वे उलझन में थे। अरुण काम को बहुत जल्दी पूरा कर सकता था, लेकिन उसके गुस्से के कारण मजदूरों के साथ झगड़ा होने की संभावना थी। मणि काम को बहुत सावधानी से करता, लेकिन उसकी सुस्ती के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो पाता।
सोमनाथ जी ने दोनों से बात की। उन्होंने अरुण की कुशलता की प्रशंसा की, लेकिन उसके गुस्से के बारे में भी बताया। उन्होंने मणि के धैर्य की तारीफ की, लेकिन उसकी धीमी गति पर भी ध्यान दिया। अंत में, सोमनाथ जी ने अरुण को चुनने का फैसला किया। उन्होंने महसूस किया कि अरुण के दोषों की तुलना में उसकी क्षमता और गुण कहीं अधिक हैं। अरुण ने जिम्मेदारी बखूबी निभाई और कुआँ सफलतापूर्वक बन गया।