चंद्रपुर नामक एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक राजकुमार रहता था। विक्रम को अपनी चमकती हुई भाले पर बहुत गर्व था। वह अक्सर कहता था, 'यह भाला ही मेरी असली ताकत है, इसी की वजह से मैंने कई मुकाबले जीते हैं।'
एक बार गाँव में दो किसानों, रवि और सोमू, के बीच ज़मीन को लेकर बड़ा विवाद हो गया। रवि का कहना था कि वह ज़मीन उसके पूर्वजों की है, जबकि सोमू के पास कागज़ात थे कि ज़मीन उसकी है। दोनों न्याय के लिए राजकुमार विक्रम के पास पहुँचे।
विक्रम को लगा कि वह अपनी शक्ति और भाले से इस समस्या को सुलझा लेगा। लेकिन जब वह दरबार में बैठा, तो उसे समझ आया कि भाला केवल युद्ध जीत सकता है, न्याय नहीं कर सकता। उसने अपना न्याय का दंड (राजदंड) उठाया। उसने रवि की मेहनत और सोमू के कागज़ातों को बहुत ध्यान से देखा। उसने पाया कि कागज़ात सोमू के नाम थे, लेकिन उस ज़मीन पर बरसों से रवि का पसीना बहा था।
विक्रम ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिससे किसी के साथ अन्याय न हो। उसने सोमू को उसका कानूनी अधिकार दिया, लेकिन साथ ही रवि के परिवार के गुजारे के लिए भी उचित प्रबंध किया। लोग विक्रम के न्याय से बहुत खुश हुए। तब विक्रम को समझ आया कि उसका भाला युद्ध में जीत दिला सकता है, लेकिन उसका न्याय ही लोगों का दिल जीत सकता है।