बहुत समय पहले, सोलापुर नामक एक सुंदर राज्य में आर्यन नाम का एक राजा राज करता था। आर्यन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी। वह हमेशा व्यस्त रहने का बहाना बनाता और लोगों को अपनी समस्याएँ बताने नहीं देता था। उसके महल के दरवाजे हमेशा बंद रहते थे।
एक दिन, मारी नाम का एक बूढ़ा किसान अपनी ज़मीन के विवाद को लेकर आया। लेकिन आर्यन ने उसे बिना सुने ही कह दिया, 'अभी समय नहीं है, फिर कभी आना।' उसी दिन कवि नाम का एक छोटा लड़का अपनी खोई हुई भेड़ के बारे में बताने आया, लेकिन राजा ने उसे भी अनसुना कर दिया।
कुछ महीने बीत गए। राज्य के लोग राजा से नाराज होने लगे। उन्होंने राजा के आदेशों का पालन करना कम कर दिया। आर्यन अपने सिंहासन पर अकेला महसूस कर रहा था। तब उसके मंत्री विक्रम ने कहा, 'महाराज, एक राजा अपने मुकुट से नहीं, बल्कि अपनी प्रजा के विश्वास से महान बनता है। आपने उनकी पुकार नहीं सुनी, इसलिए उन्होंने आपका साथ छोड़ दिया है।'
आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत महल के दरवाजे खोल दिए और लोगों से मिलना शुरू किया। उसने हर किसी की समस्या को धैर्य से सुना। धीरे-धीरे लोगों का प्यार और विश्वास फिर से लौट आया और आर्यन एक महान राजा बना।